यह लेख पानी की महत्ता, इसके धार्मिक और वैज्ञानिक पहलुओं को जोड़कर एक व्यापक दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है। इसे सरल और सहज हिंदी में समझाते हुए, हम इसे और बेहतर ढंग से अनुकूलित कर सकते हैं ताकि यह अधिक स्पष्ट और प्रभावी हो।
पानी की अहमियत
पानी इस दुनिया की सबसे कीमती चीज है क्योंकि हर जीव पानी से बना है। चाहे इंसान हो, जानवर हो या पेड़-पौधे, सभी के अस्तित्व का आधार पानी ही है। कुरान में भी कई स्थानों पर यह बताया गया है कि जीवन की उत्पत्ति पानी से हुई है। विज्ञान भी इसी तथ्य को सिद्ध करता है कि पृथ्वी पर जीवन की शुरुआत पानी से हुई थी।
कुरान और पानी का संबंध
कुरान में पानी का जिक्र कई जगहों पर मिलता है:
- हर जीव पानी से बना है – अल्लाह कहता है कि हर जीवित वस्तु को पानी से बनाया गया।
- इंसान की उत्पत्ति पानी से – कुरान में कहा गया है कि इंसान को भी पानी से ही बनाया गया।
- तमाम जीव पानी से उत्पन्न हुए – यानी जो कुछ इस धरती पर चलता-फिरता है, वह सब पानी से अस्तित्व में आया।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण
अगर हम विज्ञान को देखें, तो पृथ्वी की प्रारंभिक अवस्था आग और चट्टानों का गोला थी। वैज्ञानिकों का मानना है कि पानी पृथ्वी पर बाहरी अंतरिक्ष से आया, जब कोई धूमकेतु या क्षुद्रग्रह (एस्टेरॉइड) पृथ्वी से टकराया और रासायनिक क्रियाओं से पानी उत्पन्न हुआ।
कुरान में भी कहा गया है कि “हमने आसमान से पानी बरसाया।” इसका एक अर्थ वर्षा हो सकता है, और दूसरा यह कि पानी सच में अंतरिक्ष से आया हो।
पानी का स्वभाव और उसकी विशेषताएँ
पानी की सबसे बड़ी खासियत इसकी अनुकूलन क्षमता (Adaptability) है।
- पानी को ठंडा करें तो बर्फ बनता है।
- गर्म करें तो भाप बन जाता है।
- जब हालात सामान्य होते हैं, तो यह अपनी असली अवस्था में वापस आ जाता है।
अगर पानी में यह विशेषता न होती तो बारिशें न होतीं, ग्लेशियर न बनते, नदियाँ न बहतीं और धरती बंजर हो जाती। यही कारण है कि दुनिया की 90% से अधिक आबादी ऐसी जगह बसी है, जहां पानी 10 किलोमीटर के दायरे में उपलब्ध हो।
पानी से हुकूमत और शासन की सीख
अगर एक शासक को समझना है कि मुल्क कैसे चलाना चाहिए, तो उसे पानी से सीखना चाहिए।
- पानी ग्लेशियर से निकलता है, ऊँचाई से बहता हुआ नीचे तक पहुँचता है और सभी को जीवन प्रदान करता है।
- इसी तरह, सरकार को भी संसाधनों को ऊपर से नीचे तक, गरीब से गरीब लोगों तक पहुँचाना चाहिए, ताकि समाज में बराबरी आ सके।
अगर शरीर के किसी हिस्से में खून न पहुँचे, तो वह हिस्सा बेकार हो जाता है। ठीक उसी तरह, अगर शासन में सिर्फ अमीरों तक संसाधन सीमित रहेंगे, तो समाज असंतुलित हो जाएगा।
जल संकट और भविष्य की चुनौतियाँ
1927 में दुनिया की आबादी सिर्फ 2 अरब थी, लेकिन अब यह 8 अरब पार कर चुकी है। इसके कारण पानी की खपत कई गुना बढ़ गई है।
- सिर्फ पीने, नहाने या खाने में ही नहीं, बल्कि हर उद्योग में पानी की जरूरत होती है।
- उदाहरण के लिए, एक जींस बनाने में हजारों लीटर पानी खर्च होता है।
अगर इसी तरह पानी की बर्बादी होती रही, तो आने वाले 50-100 वर्षों में पानी के लिए देशों के बीच जंग हो सकती है। कई गरीब और कर्जदार देश पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस सकते हैं।
कैसे बचाएँ पानी?
- पानी की फिजूलखर्ची बंद करें – नल खुला न छोड़ें, जरूरत के हिसाब से ही इस्तेमाल करें।
- वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) को बढ़ावा दें – ताकि बारिश का पानी बेकार न जाए।
- सतह के नीचे पानी का स्तर बनाए रखें – अधिक बोरवेल न खोदें और पौधारोपण करें।
- उद्योगों में पानी के पुनः उपयोग (Recycling) को अपनाएँ – ताकि कम पानी में अधिक उत्पादन संभव हो।
निष्कर्ष
पानी केवल एक द्रव्य नहीं, बल्कि जीवन का आधार है। कुरान और विज्ञान दोनों इस बात पर सहमत हैं कि जीवन की उत्पत्ति पानी से हुई। यह हमारे लिए सीखने की चीज है कि हमें पानी की कद्र करनी चाहिए।
अगर इंसान पानी की तरह बहना और अनुकूल होना सीख जाए, तो दुनिया में न सिर्फ समानता आएगी, बल्कि हर कोई तरक्की कर सकेगा। हमें पानी के महत्व को समझकर इसे बचाने के उपाय अपनाने चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियों को जल संकट का सामना न करना पड़े।
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